अचार के साथ जुड़ी सेहत की डोर, 3000 साल पहले हुई थी खोज ?

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सांकेतिक तस्वीर.

अचार का इतिहास । History of Pickles

अचार नाम सुनकर मुंह में पानी आ गया ना, खट्‌टा-मीठा आम का अचार (pickle) सभी  को पंसद है. लेकिन क्या ? आपकों पता है, इसकी खोज 3000 हजार साल पहले टिगरिस घाटी में हुई थी.

दरअसल अचार फारसी मूल का शब्द है. फ्रांस में तेल, सिरका, नमक, शहद या सिरप में मांस, फल और सब्जियों को संरक्षित करते थे, जिसे अचार (pickle) कहा जाता था.

हॉब्सन-जॉब्सन के अनुसार, 1563 ईस्वी में पुर्तगाली डॉक्टर गार्सिया दा ऑर्टा ने काजू को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए तेल और सिरके का प्रयोग किया था.

दिन के भोजन में जरूरी है अचार | Pickle is important in day meal

भारतीय किदंवति है कि, दिन के भोजन में अचार (pickle) को आवश्यक रूप से शामिल किया जाना चाहिए. कारण खाने से आलस्य दूर होता है, साथ ही यह भोजन पचाने में सहायक है. दूसरी किदवंति यह भी है कि, मासिक धर्म के समय यदि महिलाएं अचार के बर्तन को हाथ लगा देती है तो यह खराब हो जाता है.

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सांकेतिक तस्वीर.

भारत ने सहेजी अचार की विरासत | India saved the heritage of pickle

भारतीय व्यंजन की थाली अचार (pickle) के बिना अधूरी मानी जाती है. शाखाहारी या मांसाहारी भोजन में अचार का प्रयोग किया जाता है. अ हिस्टोरिलकल डिक्शनरी ऑफ इंडियन  फूड के लेखक केटी अचाया द्वारा लिखी गई किताब में उल्लेख मिलता है कि, अचार को बिना आग पे पकाएं तैयार किया जाता है, बदलते समय के साथ भारत के कुछ प्रदेशों में अचार को हीट देकर तैयार किया जाता है.

भारत में अचार (pickle) को मूल रुप से तीन प्रकार से बनाया जाता है. सिरके में, नमक व तेल में. भारतीय महिलाएं आंवला, आम, नींबू, कटहल का अचार मुख्य रूप से तैयार करती है. बनाने के पूर्व उक्त सामग्री को काटकर धूप में सूखाया जाता है. जिसके बाद मसाला और तेल डालकर कई दिनों तक धूप में रखा जाता है.

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